प्रिय ब्लागर मित्रगणों,
आज वैशाखनंदन सम्मान प्रतियोगिता में श्री अविनाश वाचस्पति की रचना पढिये.
लेखक परिचय :-
अविनाश वाचस्पति,
साहित्यकार सदन, पहली मंजिल,
195 सन्त नगर,
नई दिल्ली 110065
मोबाइल 09868166586/09711537664
अमिताभ बच्चन एक दिन अविनाश वाचस्पति के घर आए
एक दिन अमिताभ बच्चन हमारे घर आए
घर में अचानक उन्हें देख हम चकराए
अमिताभ भाई ने हमें गले से लगाया
हमको अंदर तक रोमांच हो आया
हम मन ही मन सोच रहे थे
इस रहस्य को टटोल रहे थे
तीर तुक्के उन पर फेंक रहे थे
निशाना न लगने पर झेंप रहे थे
लगता है अमिताभ भाई
करोड़पति तृतीय खेल रहे हैं
पहले फोन पर करते थे बात
अब घर घर डोल रहे हैं
कवि मित्र पवन चंदन प्रतिभागी होंगे
करोड़पति बनने की लाईन में डटे होंगे
डोर ए फ्रेन्ड्स का ऑप्शन चुना होगा
अरबपति बनने का ताना बाना बुना होगा
कौन बनेगा अरबपति ?
अमिताभ बोले नहीं वाचस्पति।
अब तो शाहरूख खेल खिला रहे हैं
चैक पर साईन करने से डर दिखा रहे हैं
करोड़पति बनने के लिए
लोग तो अब भी खूब किस्मत आजमा रहे हैं
शाहरूख गले मिल रहे हैं, जफ्फी पा रहे हैं
टोटके तो किंग खान के भी लोगों को खूब भा रहे हैं
मैंने कहा यह सारी दुनिया जानती है
टीवी ने आपके दीवानों को दीवाना और बनाया है
और तो और शाहरूख भी आपका दीवाना बनने से
नहीं बच पाया है तो बाकियों की क्या बिसात है
अभी तो न जाने किन मुद्दों पर चर्चा चलती
तभी श्रीमतीजी ने चाय के लिये आवाज लगाई
चाय के लिए किया मना और खींच ली पूरी रजाई
पर फिर न तो नींद आई और न ही अमिताभ भाई
बिग बी का साथ छूट गया और हमारा सपना टूट गया।
तारीख 4 जून 2010




5 comments:
4 June 2010 17:15
nice
4 June 2010 17:22
बहुत बढ़िया स्वप्न संजोया था!
कभी सच भी अवश्य हो जायेगा!
4 June 2010 18:10
बहुत बढिया
4 June 2010 19:13
vAh vAchaspati ji, kahan laakar chhoda
13 July 2010 20:15
ओह ये तो बहुत बुरा हुया
बधाई इस पोस्ट के लिये।
Post a Comment