ताऊ की चौपाल मे आपका स्वागत है. ताऊ की चौपाल मे सांस्कृतिक, राजनैतिक, आर्थिक, धार्मिक और ऐतिहासिक विषयों पर सवाल पूछे जायेंगे. आशा है आपको हमारा यह प्रयास अवश्य पसंद आयेगा.
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आज का सवाल नीचे दिया है. इसका जवाव और विजेताओं के नाम अगला सवाल आने के साथ साथ, इसी पोस्ट मे अपडेट कर दिया जायेगा.
आज का सवाल :-
व्याकरण के आचार्य पाणिनी ने किस ग्रंथ की रचना की थी? उस ग्रंथ का नाम बताईये.
अब ताऊ की रामराम.
उत्तर :-
सही उत्तर है "अष्टाध्यायी"
और क्रमश: सही उत्तर दिये हैं...
शरद कोकास
संगीता पुरी,
जी. के. अवधिया
ललित शर्मा जी,
विवेक रस्तोगी
उडनतश्तरी
प्रकाश गोविंद
सीमा गुप्ता
मुरारी पारीक
और अशोक पांडे
इस संबंध मे इसी पोस्ट की टिप्पणियों मे प्रकाश गोविंद की टिप्पणी पर आप विस्तृत विवरण पढ सकते हैं.



22 comments:
1 December 2009 08:19
ग्रन्थ अष्टाध्यायी
1 December 2009 08:25
अष्टाध्यायी की रचना की थी।
1 December 2009 08:28
अष्टाधायी !!
1 December 2009 08:29
अष्टाधायी !!
1 December 2009 08:46
सॉरी ..स्पेलिंग में गल्ती हो गयी .. यह पुस्तक 'अष्टाध्यायी'या 'पाणिनी अष्टक' कहलाती है !!
1 December 2009 08:50
"अष्टाध्यायी" पाणिनीकृत-इसमे चार हजार सुत्र हैं। प्रथम सुत्र "वृद्धिरादैच" है। कुछ मुझे अभी तक याद हैं
1 December 2009 09:29
'अष्टाध्यायी" जिसे कि 'पाणिनीय अष्टक' भी कहा जाता है।
1 December 2009 09:29
'अष्टाध्यायी" जिसे कि 'पाणिनीय अष्टक' भी कहा जाता है।
1 December 2009 09:35
पाणिनी ने "अष्टाध्यायी " ग्रंथ की रचना की थी -शरद कोकास
1 December 2009 09:37
राम राम ताऊ जी ..पाणिनी द्वारा रचित ग्रंथ का नाम है " अष्टाध्यायी "
1 December 2009 09:47
पाणिनी द्वारा रचित ग्रंथ का नाम है -' अष्टाध्यायी'
पाणिनी मुनि अपने व्याकरण 'अष्टाध्यायी" अथवा 'पाणिनीय अष्टक' के लिये प्रसिद्ध हैं। अब तक प्रकाशित ग्रंथों में सर्वाधिक प्राचीन ग्रंथ पाणिनी का ही है।
सूत्र साहित्य में पाणिनी कृत - 'अष्टाधायायी', 'श्रौत सूत्र', 'गृह्यसूत्र' तथा धर्मसूत्र का समावेश है। पाणिनीकृता 'अष्टाध्यायी' संस्कृत व्याकरण संबंद ग्रंथ है। इसमें श्रौत सूत्रों में पुरोहितों द्वारा सम्पादित किये जाने वाले संस्कारों का विवरण है। 'धर्मसूत्र' में परम्परागत नियम तथा विधियाँ दी गयी हैं और गृह्यसूत्रों में जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त तक की जीवन विष्यक क्रियाओं का उल्लेख है।
पाणिनी के नाम से कमनीय पद्य केवल सूक्तियों में ही संग्रहित नहीं है, बल्कि कोश ग्रंथों में तथा अलंकार शास्रीय पुस्तकों में भी उधृत मिलते हैं।
1 December 2009 10:01
इतने सारो में जबाब दे दिया अब हम क्या दे ?
1 December 2009 10:03
अष्टाधायी
regards
1 December 2009 10:09
@ गोदियाल जी
आप जरा इस ग्रंथ पर प्रकाश डालिये ना.
1 December 2009 10:24
वाह वाह ये प्रकाश गोविन्द जी ने तो कमाल कर दिया भई क्यों न करें गुणोंकी खान है ये लडका भी इसे तो आशी4वाद दे ही दूंम ताऊ जी राम राम
1 December 2009 11:17
पाणीनी महिमा...
कोई तो जबाब गलत होना चाहिये न..:)
1 December 2009 12:37
yah 'dimagi kasrat 'ka idea bahut achcha hai--
yahan kafi kuchh naya seekhne ko mil raha hai.
Chaupaal ke is naye ruup ke liye Taau ji ko dhnywaad.
1 December 2009 13:16
व्याकरणाचार्य पाणिनी द्वारा लगभग ढाई हजार साल पहले रचित ग्रंथ अष्टाधायी
1 December 2009 14:51
प्रकाश को धन्यवाद जानकारी के लिए
1 December 2009 14:53
"सवाल के विषय मे आप तथ्यपुर्ण जानकारी हिंदी भाषा मे, टिप्पणी द्वारा दे सकें तो यह सराहनीय प्रयास होगा."
लोग ध्यान नहीं देते ताऊ
1 December 2009 16:47
सभी बच्चे पास है. फेल कोई नहीं. अतः हम परिक्षा नहीं दे रहे... :)
1 December 2009 16:49
ताउ की चौपाल में वैयाकरण पाणिनी और उनकी अमर कृति अष्टाध्यायी को पाकर अच्छा लगा।
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