बहनों और भाईयों, मैं उडनतश्तरी इस फ़र्रुखाबादी खेल में आप सबका हार्दिक स्वागत करता हूं.
जैसा कि आप मुझसे भी ज्यादा अच्छी तरह से जानते हैं कि मैं क्यों ५ सप्ताह तक इस खेल का आयोजक रहूंगा. इस खेल के सारे नियम कायदे सब कुछ पहले की तरह ही रहेंगे. सिर्फ़ मैं आपके साथ प्रतिभागी की बजाय आयोजक के रुप मे रहुंगा. डाक्टर झटका भी पुर्ववत मेरे साथ ही रहेंगे.
आशा करता हूं कि आपका इस खेल को संचालित करने मे मुझे पुर्ण सहयोग मिलता रहेगा क्योंकि अबकी बार आयोजकी एक दिन की नही बल्कि ५ सप्ताह की है. और इस खेल मे हम रोचकता बनाये रखें और आनंद लेते रहें. यही इसका उद्देष्य है. तो अब आज का सवाल :-
नीचे का चित्र देखिये और बताईये कि यह पुलिसमैन जिस आंख की तरफ़ निशाना लगा रहा है. वो आंख किसकी है?

तो अब फ़टाफ़ट जवाब दिजिये. इसका जवाब कल शाम को 4:00 बजे दिया जायेगा, मैं और डाक्टर झटका खेल दौरान आपके साथ रहेंगे.
"बकरा बनाओ और बकरा मेकर बनो"
.टिप्पणियों मे लिंक देना कतई मना है..इससे फ़र्रुखाबादी खेल खराब हो जाता है. लिंक देने वाले पर कम से कम २१ टिप्पणियों का दंड है..अधिकतम की कोई सीमा नही है. इसलिये लिंक मत दिजिये.



105 comments:
16 December 2009 18:01
bhediye ki !!
16 December 2009 18:03
खरगोस की आँख की तरफ !
16 December 2009 18:04
मुराई भाई राम-राम !
16 December 2009 18:04
fox!!
16 December 2009 18:04
कल आपने देख ही लिया कि सच बोलना इस देश में कितना बड़ा पाप है
16 December 2009 18:04
मेरी आपसे पूरी सहानुभूति है
16 December 2009 18:04
गोदियालजी जय सियाराम !!
16 December 2009 18:04
HIRAN
16 December 2009 18:05
अरे भाई अब भलाई का तो ज़माना ही नहीं रहा
16 December 2009 18:05
सुहानी भूति के लिए धन्यवाद !!! अप जैसे सुहानिभुतिकारों की बदोलत तो अब तक टिका हूँ!!
16 December 2009 18:06
गोदियाल जी और मुरारी जै सियाराम
16 December 2009 18:06
हिरण है (गजाला)
16 December 2009 18:06
सही है गोदियालजी ललित भाई जय रामजी की !! कल कहाँ निकल लिए थे ललित जी !!
16 December 2009 18:07
आम आदमी की तो कोई पूछ ही नहीं !
16 December 2009 18:07
आम आदमी तो बड़े लोगो की नजरो में गधा होता है
16 December 2009 18:07
आम से बढ़कर नहीं समझते ये लोग आम आदमी को
16 December 2009 18:07
बस चूसकर फिंक देते है मुरारी भाई :)
16 December 2009 18:08
बस बच गये (नही तो पुरे निकल लिए थे) गोदियाल जी, परसों रात को ढाबे मे अकेला ही छोड आए थे।
16 December 2009 18:08
जय राम जी कि ललित जी !
16 December 2009 18:09
बड़ी मुस्किल से गिरते पड़ते घर पहुँचे।
16 December 2009 18:10
ये देख लो मुरारी भाई एक आम आदमी पर ये ललित साहब भी दोषारोपण करने लगे !
16 December 2009 18:10
क्या चल रहा है बाबाओं का ज़माना आगया !! तो हमने सोचा की एक आश्रम खोल ही लेते हैं !!!
16 December 2009 18:10
आम आदमी की तो कोई पुँछ ही नहीं !
16 December 2009 18:11
ऐसी क्या बात हुई की आप एकदम से ९=२ ग्यारा हो लिए लैत्जी
16 December 2009 18:11
आम आदमी को तो बड़े लोग ऐसे समझते है कि क्या बताऊ
16 December 2009 18:11
वो अपने एक कहावत तो सुनी होगी मुरारे भाई कि नाच न जाने आँगन टेडा !
16 December 2009 18:11
lalit ji ka laitji ho gayaa !!!!
16 December 2009 18:12
मुरारी जी, थे कांई करो हो? यो सांड तो फ़ेर आ ग्यो, जेवड़ी लेके आओ, मोटी आळी, बाबा जी कैइ दिनां सुँ ढुँढ रह्यो सै इनै।
16 December 2009 18:12
आंगन ही टेढ़ा हो तो कोई कैसे नाचे !!
16 December 2009 18:13
आज सिक्किम मनिपाल उनिवार्सिटी में प्रोग्राम करके आया बड़ा मजा आया !!
16 December 2009 18:13
सांड नाथ बाबा, आपने ताउजी की वार्निंग पढी !
16 December 2009 18:13
जाओ पहले अपना रजिस्ट्रेसन करवा के आओ फिर हम आपसे बात करेंगे !
16 December 2009 18:14
ललितजी ये तो बाबाजी बन गए सान्दनाथ!!! जेवड़ी से नहीं बढ़ेंगे मंत्रोचार से बंधेंग!!!
16 December 2009 18:14
क़ानून कानून होता है
!
16 December 2009 18:14
वर्ना डाक्टर झटका को तो आप जानते ही है ! हलाल करने में ज्यादा वक्त नहीं लगता !
16 December 2009 18:15
बच्चों हम बन्धनों से तो आज़ाद हो कर बाबाजी बने और फिर से बंधने की हमारी कोई मनसा नहीं है !!
16 December 2009 18:16
Namaskar:) billi ki aankh?
16 December 2009 18:16
अरे बाँध नहीं रहे, आपसे सिर्फ देश के कायदे-क़ानून पर चलने का आग्रह कर रहे है
16 December 2009 18:17
बाबाजी ने वार्निंग को पढली !! गो दयाल साब अब ज़रा कुछ घास फुस्स हो तो खाएं वरना अगले दुआरे !!
16 December 2009 18:17
राम-राम रेखा जी,
16 December 2009 18:17
ये नमस्कार बिल्ली की आँख कोनसी है रेखाजी !!!
16 December 2009 18:18
कानूनों का पालन किया जाए।
16 December 2009 18:18
"गो" दयाल साब
अरे ये कहाँ इशारा कर रहे सांड नाथ बाबा ! go kaa kyaa matlab samjhu ?
16 December 2009 18:19
aap to mere sath chaliye go dayaal saab!!!
16 December 2009 18:19
ललितजी आपकी मूंछों के ताव से सांड नाथ का कुछ करते हैं!!!
16 December 2009 18:20
यार बाबा आप मेरे पीछे क्यों पड़े हो मैं तो वैसे ही वक्त का मारा हूँ !
16 December 2009 18:20
naye baba ji pranam!!
16 December 2009 18:21
हाँ!मुछों कै बांध दे,मुरारी जी।
16 December 2009 18:21
गो दयालजी आप जब गो पर दया का भाव रखते हैं तो सांड भी उसी प्रजाति का है !!!
16 December 2009 18:23
मुन्छ्याँ की जेवडी बनाओ ललित एक सांठी सी ! ललित जी फेर देखो सांदनाथ का मजा!!!
16 December 2009 18:23
अलख निरंजन बच्चा लोग्।
16 December 2009 18:23
ji chhutgyo!!
16 December 2009 18:25
प्राणाम श्ठेस्वर नाथजी !!!
16 December 2009 18:25
गो दयालजी आप जब गो पर दया का भाव रखते हैं तो सांड भी उसी प्रजाति का है !!!
ha-ha-ha-ha.. aapkaa yah daaylog pasand aayaa baabaa
16 December 2009 18:25
16 December 2009 18:26
चलो एक से दो बाबा भले ! दूसरे बाबा को भी राम राम
16 December 2009 18:27
सत्य बोलना हानिकारक है गोदियालजी !!!
16 December 2009 18:27
हमार संत लोग नही दिख रहे है, हमरा भी चिलमवा खतम हुई जा रहा है, तनि चिलम का ईंतजाम करो मुरारी बच्चा। और हमरा लंगोटी का क्या हुआ, केतना दिन हो गया बिना लंगोटी के घुम रहे हैं।
16 December 2009 18:28
कबीरा संगती साधू की जो गंधी का बास,
जो कछु गंधी दे नहीं त्यों भी बास सुबास | ...
16 December 2009 18:29
मुरारी भाई यही तो मैं आपको इतनी देर से समझा रहा था
आज ये अपना लाडला मकरंद कहाँ गया ?
16 December 2009 18:29
और बाबालोग आज पधारे नहीं इस ख़ास मौके पर आज तो बाबा सम्मलेन है !
16 December 2009 18:29
कबीरा माला काठ की, कही समझावे तोही
मन न फिरावे आपना, कहा फिरावे मोही.
16 December 2009 18:30
मुरारी बच्चा। और हमरा लंगोटी का क्या हुआ, केतना दिन हो गया बिना लंगोटी के घुम रहे हैं।
16 December 2009 18:30
संगत से गुण होत है बुधजन कहत बखान !!
गाँधी और लुहार की देखो बैठ दूकान !!
16 December 2009 18:30
राम बुलावा भेजिया, दिया कबीरा रोय
जो सुख साधू संग में, सो बैकुंठ न होय
16 December 2009 18:32
बाबाजी लंगोटी बनाने के ललितजी को भेजी थी उन्होंने. मना किया तो महफूज भाई के पास गयी !!अब महफूज भाई नाप मांग रहे है!!!
16 December 2009 18:33
कबीरा यह गति अटपटी , चटपटी लखी न जाये जो मन की खटपट पिटे , अधर भया ठहराए !
16 December 2009 18:33
हे भगवान! आप पहेली हल कर रहे हैं या साखी दोहे का कमपीटिशन चल रहा है।
16 December 2009 18:33
And Bye-Bye !!
16 December 2009 18:34
waah godiyaalji !!
प्रीत प्रीत सब करे कठिन तासु की रीत!
आदि अंत निभे नहीं बालू की सी भिंत !!
16 December 2009 18:34
कहाँ चल दिये गोदियाल साब एक एक हो जाए। फ़िर चले जाना।
16 December 2009 18:34
प्रीत जहां पर्दा नहीं पर्दा जहां नहीं प्रीत!
प्रीत करे पर्दा करे प्रीत नहीं विपरीत!!
16 December 2009 18:36
ठहरो भाई गोदियाल साब !! अच्छी चल रही थी !
16 December 2009 18:36
हम पिए जो घूँट है ललित शर्मा जी न पिलाए सोय
एक घुट पानी का पीया भी तो क्या पीवे है मोय :)
16 December 2009 18:37
यो ललित तो बेजाँ गोरो चिट्टों है किस्यो क्रीम फाफेड़े रे भाया !!!
16 December 2009 18:38
दिमाग आसमानी बुलंदी पर है, मुश्किल है धरा पर उतार पाना
तुम रहने दो, तुम्हारे बस का नहीं इस बिगडैल को सुधार पाना
रंग-ढंग सब बिगड़ा पड़ा है, नामुमकिन है उसमे निखार आना
साथ में किस्मत भी बिगड़ी पडी है, आसान नहीं सवार पाना
16 December 2009 18:39
एक मैं भी सूना देतो हूँ!!
सठ स्नेह जीर्ण वसन यत्न करत फट जाय!!!
स्वच्छ प्रीती रेशम लछ उरझत सुर्झत जाय!!
16 December 2009 18:39
सिपाही जी चूहे की आंख का निशाना लगा रहे हैं चूहा पहाडी है मल्टी कलर वाला
16 December 2009 18:40
निज पूरबले दत्त बिन संगत ना गुण होय!!
पारस संग सैट वर्ष रह कष्ट स्वर्ण ना होय !!
16 December 2009 18:42
संग दोश्ते साधुजन परत न दूषण माहि!!विष धर ही लपटे रहे चन्दन में विष नाही!!
16 December 2009 18:43
वैसे चलते-चलते एक बात पूछनी थी :
कनाडा में इतनी बर्फ पड़ गई क्या ???????
16 December 2009 18:43
oh lagtaa hai baaki sab chale gaye saannaath rah gaye !!
16 December 2009 18:44
कनाडा वाले नहीं आये इसलिए???
16 December 2009 18:49
जय हो.
भक्तों को बाबा का बहुत आशीष.
बाबा के आश्रम पधार कर आशीर्वाद ले लो...
नोट:
. पहेली में भी जीतने के लिए आश्रम में हवन करवाया जाता है.
. हमारी कोई ब्रान्च नहीं है.
. नकलचियों से सावधान.
. ब्लॉगजगत के एकमात्र सर्टीफाईड एवं रिक्गनाईज्ड बाबा.
-सबका कल्याण हो!!
सूचना:
-बाबा प्रॉडक्टस के लिए आश्रम पधारें-
कुंभ की विशेष छूट
बेहद सस्ते दामों पर
महा सेल-महा सेल-महा सेल
नोट:
ऐसा मौका फिर १२ साल बाद आयेगा.
16 December 2009 18:50
बर्फ अभी भी गिर रही है. मगर दफ्तर तो जाना ही पड़ेगा. मकरंद की टूशान तो है नहीं कोई. :)
16 December 2009 18:50
जय हो बाबा समीरानंद जी महाराज की, गोड़ लागी महाराज
16 December 2009 18:53
सभी को प्रणाम!! ललित भाई तक को प्रणाम!!
16 December 2009 18:54
सूचना
अभी तक सही जबाब नहीं आया है. यही हिंट है.
16 December 2009 19:06
प्रणाम महाराज!! haanji daagdhar saab !!!
16 December 2009 19:07
ललित भाई "तक को" प्राणाम से क्या आशय है!!!ha..ha..
16 December 2009 19:09
kuttey ki aankh hogee!!
16 December 2009 19:12
red panda!!
16 December 2009 19:13
guinea pig
16 December 2009 19:21
kisi naquabdhari aatankwadi ki ankh:)
16 December 2009 19:25
ललित भाई तक को
का मतलब वैसा ही है जैसे एक दिन कहा था..
सभी सज्जनों को एवं मुरारी बाबू को भी....
:)
उस दिन तो आशय नहीं पूछा था..फिर आज एकाएक क्यूँ?? हा हा
16 December 2009 19:37
लेकिन ये तक कहा चले सब!!!
16 December 2009 19:38
चलियी १०० का आंकड़ा तो मैं पार कर ही देता हूँ!!
16 December 2009 19:38
सिर्फ तीन टिप्पणियों की ही तो बात है!!
16 December 2009 19:38
अब हुई अब हुई!!!
16 December 2009 19:39
आखिर हो गई 100
16 December 2009 19:42
Black Jaguar
16 December 2009 20:50
जनता की!
16 December 2009 23:02
सैनिक पुतले की आंख को निशाना बना रहा है
16 December 2009 23:08
सद्दाम हुसैन की१!
17 December 2009 16:28
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